रक्षा बंधन क्यों मनाया जाता है - रक्षाबंधन का इतिहास हिंदी में

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Raksha Bandhan Kyu Manaya Jata Hai: नमस्कार दोस्तों, 'Techno Preet' ब्लॉग में आपका स्वागत है। क्या आप जानते हैं कि रक्षा बंधन क्यों मनाया जाता है? (Raksha Bandan Kyu Manaya jata hai). रक्षाबंधन का त्‍योहार सावन के महीने में पूर्णिमा को मनाया जाता है। रक्षा बंधन दो शब्दों को मिलाकर बनता है, रक्षा और बंधन। जिसका मतलब एक ऐसा बंधन जो रक्षा करता हो। आज के इस आर्टिकल में हम रक्षा बंधन के इतिहास के बारे में जानेंगे।


रक्षा बंधन भाई-बहन का प्रतीक माना जाता है। रक्षा बंधन भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को जताता है और घर में खुशिया लेकर आता है। इसके अलावा यह त्योहार भाईयों को याद दिलाता है कि उन्हें अपनी बहनों की रक्षा करनी चाहिए। अगर आप ये नहीं जानते कि 2022 में राखी कब है तो आप ये पोस्ट पढ़ सकते हैं कि रक्षा बंधन 2020 में कब है?


रक्षाबंधन का त्यौहार भारत के प्रमुख हिंदू त्यौहारों में से एक है जिसे भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक माना जाता है, हिन्दू पंचांग के अनुसार यह पर्व हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इस साल 2022 में राखी 11 अगस्त को गुरुवार के दिन मनाई जा रही है। इसमें बहने अपने भाईयों की कलाई पर रक्षा सूत्र (राखी) बांधती है, और उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं, वही भाई भी इसके बदले उनकी उम्र भर रक्षा करने का वचन देते हैं। कई लोग इसे ‘राखी का त्यौहार‘ भी कहते हैं।


रक्षा बंधन क्यों मनाते हैं (Why do we celebrate Raksha Bandhan)


हिंदुओं के पवित्र त्योहारों में से एक और भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक रक्षाबंधन का त्यौहार अनंत खुशियाँ लेकर आता है, यह भाईयों को बहनों के प्रति उनके कर्तव्यों की याद दिलाता है। रक्षाबंधन शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है रक्षा + बंधन अथार्त् रक्षा का बंधन। इस दिन बहनें अपने भाईयों की कलाई पर रक्षा सूत्र (राखी) बांधती हैं और उनकी लम्बी आयु की कामना करती है, तो वहीं भाई ताउम्र उनकी रक्षा का वचन देते है और उन्हें भेंट में कोई ना कोई उपहार भी देते हैं।


Raksha Bandhan Kyu Manaya Jata Hai

रक्षा बंधन का त्योहार भाई को अपनी बहन के प्रति उसका कर्तव्य याद दिलाता है। इस त्योहार को केवल सगे भाई-बहन ही नहीं बल्कि कोई भी पुरुष-महिला मना सकते हैं। इस दिन सभी बहनें अपने भाईयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और उसकी खुशी और स्वास्थय के लिए मन्नत मांगती हैं। भाई भी राखी बांधने के बदले अपनी बहन को गिफ्ट देता है और उसकी रक्षा करने की प्रतिज्ञा करता है


रक्षाबंधन के त्यौहार का महत्व (Raksha bandhan Importance)


रक्षाबंधन भाई बहनो के बीच मनाया जाने वाला पर्व है। इस दिन बहन अपने भाइयों को रक्षा धागा बंधती हैं और भाई अपनी बहनों को जीवन भर उनकी रक्षा करने का वचन देते हैं। इस त्यौहार के दिन सभी भाई बहन एक साथ भगवान की पूजा आदि करके आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।


रक्षाबंधन पर कहानी (Raksha Bandhan Story in Hindi)


रक्षा बंधन से संबंधी बहुत सारी कहानियां हैं। रक्षाबंधन से संबंधित कुछ पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं। जिन्हें आपका जानना बहुत जरूरी है। चलिए जानते हैं रक्षा बंधन से जुड़ी कहानियां...


- इंद्रदेव सम्बंधित मिथक


भविष्यत पुराण के अनुसार दैत्यों और देवताओं के मध्य होने वाले एक युद्ध में भगवान इंद्र को एक असुर राजा, राजा बलि ने हरा दिया था। इस समय इंद्र की पत्नी सची ने भगवान विष्णु से मदद मांगी। भगवान विष्णु ने सची को सूती धागे से एक हाथ में पहने जाने वाला वयल बना कर दिया। इस वलय को भगवान विष्णु ने पवित्र वलय कहा। सूती ने इस धागे को इंद्र की कलाई में बाँध दिया तथा इंद्र की सुरक्षा और सफलता की कामना की। इसके बाद अगले युद्द में इंद्र बलि नामक असुर को हारने में सफ़ल हुए और पुनः अमरावती पर अपना अधिकार कर लिया। यहां से इस पवित्र धागे का प्रचलन आरम्भ हुआ। इसके बाद युद्द में जाने के पहले अपने पति को औरतें यह धागा बांधती थीं। इस तरह यह त्योहार सिर्फ भाइयों बहनों तक ही सीमित नहीं रह गया।


- राजा बलि और मां लक्ष्मी


भगवत पुराण और विष्णु पुराण के आधार पर यह माना जाता है कि जब भगवान विष्णु ने राजा बलि को हरा कर तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया, तो बलि ने भगवान विष्णु से उनके महल में रहने का आग्राह किया। भगवान विष्णु इस आग्रह को मान गये, हालांकि भगवान विष्णु की पत्नी लक्ष्मी को भगवान विष्णु और बलि की मित्रता अच्छी नहीं लग रही थी, अतः उन्होंने भगवान विष्णु के साथ वैकुण्ठ जाने का निश्चय किया। इसके बाद माँ लक्ष्मी ने बलि को रक्षा धागा बाँध कर भाई बना लिया। इस पर बलि ने लक्ष्मी से मनचाहा उपहार मांगने के लिए कहा। इस पर माँ लक्ष्मी ने राजा बलि से कहा कि वह भगवान विष्णु को इस वचन से मुक्त करे कि भगवान विष्णु उसके महल मे रहेंगे। बलि ने ये बात मान ली और साथ ही माँ लक्ष्मी को अपनी बहन के रूप में भी स्वीकारा।


- संतोषी माँ से संबधित मिथक 


भगवान विष्णु के दो पुत्र हुए शुभ और लाभ। इन दोनों भाइयों को एक बहन की कमी बहुत खलती थी, क्योंकि बहन के बिना वे लोग रक्षाबंधन नहीं मना सकते थे। इन दोनों भाइयों ने भगवान गणेश से एक बहन की मांग की। कुछ समय के बाद भगवान नारद ने भी गणेश को पुत्री के विषय में कहा। इस पर भगवान गणेश राजी हुए और उन्होंने एक पुत्री की कामना की। भगवान गणेश की दो पत्नियों रिद्धि और सिद्धि, की दिव्य ज्योति से माँ संतोषी का अविर्भाव हुआ। इसके बाद माँ संतोषी के साथ शुभ लाभ रक्षाबंधन मना सके।


- कृष्ण और द्रौपदी संबंधित मिथक


महाभारत युद्ध के समय द्रौपदी ने कृष्ण की रक्षा के लिए उनके हाथ मे राखी बाँधी थी। इसी युद्ध के समय कुंती ने भी अपने पौत्र अभिमन्यु की कलाई पर सुरक्षा के लिए राखी बाँधी। इसलिए महाभारत के समय भी रक्षा के लिए बंधन का प्रचलन हुआ था।


- यम और यमुना संबंधित मिथक 


एक अन्य पौराणिक कहानी के अनुसार, मृत्यु के देवता यम जब अपनी बहन यमुना से 12 वर्ष तक मिलने नहीं गए, तो यमुना दुखी हुई और माँ गंगा से इस बारे में बात की। गंगा ने यह सुचना यम तक पहुंचाई कि यमुना उनकी प्रतीक्षा कर रही हैं। इस पर यम युमना से मिलने आये। यम को देख कर यमुना बहुत खुश हुईं और उनके लिए विभिन्न तरह के व्यंजन भी बनाई। यम को इससे बेहद ख़ुशी हुई और उन्होंने यमुना से कहा कि वे मनचाहा वरदान मांग सकती हैं। इस पर यमुना ने उनसे ये वरदान माँगा कि यम जल्द पुनः अपनी बहन के पास आएं। यम अपनी बहन के प्रेम और स्नेह से गद गद हो गए और यमुना को अमरत्व का वरदान दिया। भाई बहन के इस प्रेम को भी रक्षा बंधन के हवाले से याद किया जाता है।


रक्षाबंधन का इतिहास क्या हैं (Raksha Bandhan History in Hindi)


Raksha Bandhan History in Hindi

रक्षा बंधन हर साल बहन-भाई मनाते हैं। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसकी लंबी उम्र की कामना करती है। इसके बदले में भाई अपनी बहनों को उसकी रक्षा का वचन देते हैं। लेकिन आज भी ज्यादातर लोगों को पता नहीं है कि रक्षा बंधन का इतिहास क्या है (Raksha Bandhan History in Hindi) चलिए जानते हैं रक्षा बंधन का इतिहास...


- सिकंदर और राजा पुरु


एक महान ऐतिहासिक घटना के अनुसार जब 326 ई पू में सिकंदर ने भारत में प्रवेश किया। सिकंदर की पत्नी रोशानक ने राजा पोरस को एक राखी भेजी और उनसे सिंकंदर पर जानलेवा हमला न करने का वचन लिया। परंपरा के अनुसार कैकेय के राजा पोरस ने युद्ध भूमि में जब अपनी कलाई पर बंधी वह राखी देखी तो सिकंदर पर व्यक्तिगत हमले नहीं किये।


- रानी कर्णावती और हुमायूं


एक अन्य ऐतिहासिक गाथा के अनुसार रानी कर्णावती और मुग़ल शासक हुमायूं से संबंधित है। सन 1535 के आस पास की इस घटना में जब चित्तोड़ की रानी को यह लगने लगा कि उनका साम्राज्य गुजरात के सुलतान बहादुर शाह से नहीं बचाया जा सकता तो उन्होंने हुमायूं, जो कि पहले चित्तोड़ का दुश्मन था, को राखी भेजी और एक बहन के नाते मदद मांगी। हालांकि इस बात से कई बड़े इतिहासकार इत्तेफाक नहीं रखते, जबकि कुछ लोग पहले के हिन्दू मुस्लिम एकता की बात इस राखी वाली घटना के हवाले से करते हैं।


- 1905 का बंग भंग और रविन्द्रनाथ टैगोर


भारत में जिस समय अंग्रेज अपनी सत्ता जमाये रखने के लिए ‘डिवाइड एंड रूल’ की पालिसी अपना रहे थे, उस समय रविंद्रनाथ टैगोर ने लोगों में एकता के लिए रक्षाबंधन का पर्व मनाया। वर्ष 1905 में बंगाल की एकता को देखते हुए ब्रिटिश सरकार बंगाल को विभाजित तथा हिन्दू और मुस्लिमों में सांप्रदायिक फूट डालने की कोशिश करती रही। इस समय बंगाल में और हिन्दू मुस्लिम एकता बनाए रखने के लिए और देश भर में एकता का सन्देश देने के लिए रविंद्रनाथ टैगोर ने रक्षा बंधन का पर्व मनाना शुरू किया।


- सिखों का इतिहास


18वीं शताब्दी के दौरान सिख खालसा आर्मी के अरविन्द सिंह ने राखी नामक एक प्रथा का अविर्भाव किया, जिसके अनुसार सिख किसान अपनी उपज का छोटा सा हिस्सा मुस्लिम आर्मी को देते थे और इसके एवज में मुस्लिम आर्मी उन पर आक्रमण नहीं करते थे। महाराजा रणजीत सिंह, जिन्होंने सिख साम्राज्य की स्थापना की, की पत्नी महारानी जिन्दान ने नेपाल के राजा को एक बार राखी भेजी थी। नेपाल के राजा ने हालाँकि उनकी राखी स्वीकार ली किन्तु, नेपाल के हिन्दू राज्य को देने से इनकार कर दिया।


अंतिम शब्द


रक्षा बंधन का पर्व हर वर्ष सावन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। मान्यताओं के अनुसार द्रोपदी ने भगवान श्री कृष्ण को रक्षा सूत्र बांधा था। इसी वजह से भगवान श्री कृष्ण ने भरी सभा में उन्हें निर्वस्त्र होने से बचाया था। इसलिए इस आर्टिकल में आपको पूरी जानकारी दी गई है कि रक्षा बंधन क्यों मनाया जाता है और रक्षा बंधन का इतिहास क्या है?


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FAQ


प्रश्न: रक्षा बंधन कब मनाया जाता है।

उत्तर- रक्षा बंधन हर वर्ष सावन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है।


प्रश्न: रक्षाबंधन का त्यौहार कब मनाया जाता है ?

उत्तर- श्रावण माह की पूर्णिमा के दिन


प्रश्न : राखी 2022 में कितनी तारीख को है ?

उत्तर- 11 अगस्त


प्रश्न: रक्षाबंधन क्यों मनाई जाती है?

उत्तर- रक्षाबंधन का त्योहार भाई को अपनी बहन के प्रति उसका कर्तव्य याद दिलाता है।


प्रश्न: इस साल राखी बंधने का शुभ मुहूर्त कितने बजे का है ?

उत्तर- सुबह 6:15 बजे से रात 7:40 बजे तक


प्रश्न: रक्षाबंधन कैसे मनाया जाता है?

उत्तर- इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसकी लंबी उम्र की कामना करती है। इसके बदले में भाई अपनी बहनों को उसकी रक्षा का वचन देते हैं। 


प्रश्न: रक्षाबंधन का त्यौहार कैसे मनाते हैं ?

उत्तर- बहनें अपने भाइयों को राखी बांधती है।

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